पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से करीब 8 महीने पहले अंदरूनी कलह तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी अपने समर्थक नेताओं के साथ दिल्ली पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि वे पार्टी हाईकमान के सामने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बयानों और संगठन से जुड़े मुद्दों को उठाएंगे।
कारण बताओ नोटिस जारी
चन्नी के साथ सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक प्रगट सिंह समेत कई नेता भी दिल्ली पहुंचे हैं। वहीं, राजा वड़िंग ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चन्नी की बैठकों को पार्टी की “एकता की ताकत” बताया है और अनुशासनहीनता के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
उधर, पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पंजाब पहुंच गए हैं। वे अगले कुछ दिनों तक पार्टी नेताओं से मुलाकात कर मौजूदा विवाद पर चर्चा करेंगे।
दरअसल, 1 जुलाई को कांग्रेस हाईकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए रखा, जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद से चन्नी गुट लगातार बैठकों के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है।
चन्नी गुट का कहना है कि संगठन से जुड़े फैसलों पर उनकी बात नहीं सुनी गई, जबकि राजा वड़िंग का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है और सभी नेता मिलकर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
राहुल गांधी के भारत लौटने के बाद होगी बैठक
फिलहाल पार्टी हाईकमान पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। राहुल गांधी के भारत लौटने के बाद इस मामले में अहम बैठक होने की संभावना है। वहीं, भूपेश बघेल सभी नेताओं से बातचीत कर उनकी राय हाईकमान तक पहुंचाएंगे।