ख़बरिस्तान नेटवर्क : भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में युवा विकास, उद्यमिता, पर्यावरण स्थिरता, चेतना अध्ययन और शिक्षा से जुड़ी पांच प्रमुख राष्ट्रीय पहलों की शुरुआत की है।
यह भव्य आयोजन द आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के मानवीय सेवा में 45 वर्ष पूरे होने और इसके संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के 70वें जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित किया गया।
इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए उपराष्ट्रपति ने अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में एक विशेष स्मारक डाक टिकट भी जारी किया, जो वैश्विक शांति और सामाजिक परिवर्तन में संस्था के योगदान को दर्शाता है।
द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में महीने भर चले इस उत्सव में देश-विदेश के 678 प्रतिष्ठित अतिथियों ने शिरकत की। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सर्बानंद सोनोवाल, मुकेश अंबानी, अनंत अंबानी और अभिनेता रजनीकांत जैसी राजनीतिक, व्यापारिक, आध्यात्मिक और कला जगत की दिग्गज हस्तियां शामिल रहीं।
उपराष्ट्रपति ने की वैश्विक प्रभाव की सराहना
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर की दूरदर्शिता और द आर्ट ऑफ लिविंग की असाधारण वैश्विक पहुंच की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि आज यह आंदोलन दुनिया के 182 देशों में फैल चुका है और मानव सभ्यता को आपस में जोड़ रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि संघर्षों से घिरे इस संसार में गुरुदेव अपनी सरलता, विनम्रता और स्नेह से करोड़ों जीवनों में आंतरिक शांति और बाह्य सामंजस्य की अलख जगा रहे हैं।
ध्यान और ज्ञान पर गुरुदेव का संदेश
उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने आज के दौर में आंतरिक विकास की प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया अब यह मान चुकी है कि ध्यान कोई विलासिता नहीं बल्कि एक स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन की मूलभूत आवश्यकता है।
उन्होंने ‘विश्व ध्यान दिवस’ के लिए 192 देशों के एकजुट होने का उदाहरण देते हुए कहा कि मानव विकास के लिए जीवन में ज्ञान, ध्यान और संगीत का होना अनिवार्य है। गुरुदेव ने एक बार फिर भय, तनाव और नफरत से मुक्त ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (वैश्विक परिवार) का आह्वान किया।
कर्नाटक और संस्थान का अटूट रिश्ता
इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि इस वैश्विक आंदोलन की जड़ें कर्नाटक की पवित्र भूमि से जुड़ी हुई हैं। राज्यपाल ने मानवीय सेवा के साथ-साथ दुनिया के दीर्घकालिक संघर्षों को सुलझाने और समाज को हिंसा-मुक्त बनाने में गुरुदेव के शांति-प्रयासों की सराहना की।
लॉन्च की गईं पांच प्रमुख राष्ट्रीय पहलें
इस समारोह के दौरान शुरू की गईं पांचों पहलें आधुनिक समाज की तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम हैं:
- यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम: यह कार्यक्रम युवाओं को सिविल सेवा की तैयारी कराने के साथ-साथ ग्रामीण व शहरी युवाओं को रोजगार के लिए उद्योग-उन्मुख आतिथ्य (Hospitality) प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
- फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स: यह बहुविषयक मंच पूर्वी ज्ञान परंपराओं को आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान के साथ जोड़ेगा ताकि समकालीन नैतिक और सामाजिक चुनौतियों का समाधान खोजा जा सके।
- आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन: इस पहल का लक्ष्य मेंटरशिप और शुरुआती फंडिंग के जरिए 500 नए और हार्डवेयर-केंद्रित स्टार्टअप को बढ़ावा देना है।
- सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडी एंड ह्यूमन पोटेंशियल: यह केंद्र चेतना, मानसिक कल्याण और मानव क्षमता के क्षेत्र में अंतःविषय अनुसंधान (Interdisciplinary Research) को बढ़ावा देगा।
- इको शांति: पर्यावरण को बचाने की इस मुहिम का उद्देश्य सिंगल-यूज प्लास्टिक को पूरी तरह समाप्त करना है, जिसके तहत 2030 तक प्लास्टिक उत्पादन और उपयोग में सालाना 1 लाख टन की कमी लाने का लक्ष्य है।
आश्रम की गतिविधियों का अवलोकन
अपनी यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति ने आश्रम की विभिन्न अनूठी पहलों का जायजा लिया। उन्होंने ‘श्री श्री गुरुकुलम’ में छात्रों से बातचीत की, प्रताप गणपति मंदिर और श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए तथा 1,600 स्वदेशी गायों वाली ‘श्री श्री गौशाला’ का भ्रमण किया। इस दौरान ‘इंट्यूशन प्रोग्राम’ के बच्चों ने अपने विशेष प्रशिक्षण के दम पर विकसित की गईं सहज ज्ञान (Intuitive) क्षमताओं का प्रदर्शन कर अतिथियों को चकित कर दिया।