मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब और गंभीर होता जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट के पास ओमान के समुद्री क्षेत्र में दो तेल टैंकरों पर हुए ईरानी मिसाइल हमले में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों समेत आठ लोग घायल हो गए।
यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘मोंबासा’ और ‘अल बहिया’ नामक तेल टैंकरों को ईरान की दो क्रूज मिसाइलों ने निशाना बनाया। हमले के बाद दोनों जहाजों में अफरा-तफरी मच गई और कई क्रू मेंबर घायल हो गए।
इधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि जवाबी कार्रवाई में अमेरिका ने करीब पांच घंटे तक ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन हमलों में बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनार्क, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना ने कहा कि मध्य पूर्व में फिलहाल 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी ईरान की सैन्य क्षमताओं को लगभग खत्म कर दिया है और अब इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा अमेरिका करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया हमलों के बाद ईरान “स्टोन एज” जैसी स्थिति में पहुंच गया है।
पिछले 24 घंटे के प्रमुख घटनाक्रम
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के बदले अमेरिका ने कार्गो पर 20% शुल्क लगाने का ऐलान किया।
CENTCOM ने बंदर अब्बास स्थित ईरान के नौसैनिक अड्डों और सबमरीन सुविधाओं पर भी हमले किए।
ईरान ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा और अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
रूस का विशेष कमांड विमान Tu-214PU तेहरान पहुंचने का दावा भी सामने आया है।
तनाव लगातार बढ़ रहा
ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया है। वहीं, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले का भी दावा किया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उधर, बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही दो महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से अधिक बढ़कर करीब 78 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।