ख़बरिस्तान नेटवर्क : पंजाब में फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर छिड़ा विवाद गहराता जा रहा है। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू द्वारा फिल्म के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के बीच, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने बिट्टू के बयानों और फिल्म के विरोध के तरीके पर असहमति जताते हुए कहा कि इतिहास से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता, लेकिन पुरानी घटनाओं का इस्तेमाल वर्तमान में लोगों के बीच दरार पैदा करने के लिए करना उचित नहीं है।
कैप्टन ने रवनीत बिट्टू को दी सलाह
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू पर निशाना साधते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो और तस्वीरें साझा करना, जिससे समाज में नकारात्मकता फैले, सही नहीं है। कैप्टन ने साफ किया कि आतंकवाद के दौर की घटनाओं को केवल एकतरफा चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उस दौर में यदि करीब 25 हजार लोग मारे गए, तो आतंकवाद से मुकाबला करते हुए 1,800 पुलिसकर्मियों ने अपनी शहादत दी और हजारों निर्दोष नागरिकों ने भी जान गंवाई। उनका मानना है कि दोनों पक्षों की सच्चाई और उस दौरान हुई ज्यादतियों का पूरा संदर्भ सामने आना चाहिए।
राजनीतिक लाभ के लिए हो रही बयानबाजी
फिल्म के ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद बढ़ती चर्चाओं पर कैप्टन ने दावा किया कि इस विवाद से न तो भाजपा को और न ही कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ मिलने वाला है। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल, वारिस पंजाब दे और अकाली दल (पुनर्जीवन) जैसे संगठनों का नाम लेते हुए कहा कि ये दल इस संवेदनशील मुद्दे से अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं।
केपीएस गिल का किया बचाव
कैप्टन ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के कार्य का जिक्र करते हुए कहा कि लापता लोगों के सबूत जुटाना गलत नहीं था। हालांकि, उन्होंने नई पीढ़ी को भड़काने के प्रति आगाह किया। उन्होंने आतंकवाद के दौर में हिंदू-सिख एकता को याद करते हुए पूर्व पुलिस प्रमुख केपीएस गिल का बचाव किया और कहा कि पंजाब से आतंकवाद को जड़ से खत्म करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।