अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। वॉशिंगटन का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान पर दबाव बढ़ाने और उसे बातचीत की मेज पर लाने के लिए की जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि हमले अभी रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम मंगलवार रात भी हमला करेंगे, उसके अगले दिन भी करेंगे। अगले हफ्ते ईरान के बिजलीघर और पुल भी निशाने पर होंगे। अगर समझौता नहीं किया, तो वहां कुछ नहीं बचेगा।”
ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर जमीनी सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है, जिसमें सहयोगी देशों की मदद भी ली जाएगी।
पिछले 24 घंटे की बड़ी घटनाएं
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमला किया। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हुए। जहाज पर कुल 20 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद थे।
हमले के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और होर्मुज स्ट्रेट खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20 फीसदी टैक्स लगाने का फैसला वापस ले लिया। यह निर्णय मिडिल ईस्ट के नेताओं से बातचीत के बाद लिया गया।सुरक्षा संकट के बीच मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट से केवल चार जहाज गुजर सके, जो हाल के दिनों में सबसे कम समुद्री आवाजाही मानी जा रही है।
ईरान के जवाबी हमले का दावा
ईरान की IRGC ने दावा किया है कि उसने बुधवार सुबह बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट बेस पर हमला कर कमांड सेंटर, हथियारों के गोदाम और फ्यूल टैंक को निशाना बनाया। हालांकि अमेरिका और बहरीन ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इसके अलावा ईरान ने कुवैत में अमेरिकी सैन्य गोदाम पर ड्रोन हमला करने का भी दावा किया है। वहीं बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
सात घंटे तक चला अमेरिकी सैन्य अभियान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने करीब सात घंटे तक ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया। फाइटर जेट, ड्रोन और नौसैनिक जहाजों की मदद से मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, नौसैनिक संसाधन और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया।
ट्रम्प का सख्त संदेश
ट्रम्प ने कहा कि ईरान केवल ताकत की भाषा समझता है। उनके मुताबिक, “इन लोगों से सिर्फ सैन्य ताकत के दम पर ही बातचीत हो सकती है।” उन्होंने यह भी दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट हर हाल में खुला रहेगा, क्योंकि यह दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
इस बीच अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि वह 30 सितंबर तक इराक से अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह खत्म कर देगा। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अब अमेरिका का ध्यान इराक में सैन्य अभियान की बजाय आर्थिक और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर रहेगा।