ख़बरिस्तान नेटवर्क : देश में NEET पेपर लीक को लेकर सियासी माहौल गर्म है। दिल्ली में छात्र और विपक्षी दल केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि पेपर लीक के दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
इसके जवाब में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पिछले 10 सालों में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि करोड़ों छात्र और उनके परिवार इस समस्या से प्रभावित हुए हैं।
पेपर लीक सिर्फ एक सरकार तक सीमित नहीं
परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के मामले किसी एक राजनीतिक दल या सरकार तक सीमित नहीं रहे हैं। अलग-अलग समय में केंद्र और राज्यों में भाजपा, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों की सरकारों के दौरान भी कई बड़ी परीक्षाएं विवादों में रही हैं।
हाल के सालों में राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भी शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आए। इन राज्यों में अलग-अलग समय पर कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों की सरकारें रही हैं। वहीं, UPA सरकार के कार्यकाल में भी AIIMS, SSC, CBSE, AIEEE और PMT जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
धर्मेंद्र प्रधान ने कभी खुद पेपर लीक के खिलाफ किया था प्रदर्शन
सोशल मीडिया पर 1997 की एक घटना भी चर्चा में है। उस समय मौजूदा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव थे। ओडिशा में प्रश्नपत्र लीक के विरोध में उन्होंने छात्रों के साथ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में वह घायल हुए थे, लेकिन आंदोलन जारी रखा था।

सोशल मीडिया पर चर्चाएं चल रही हैं कि जिस व्यक्ति ने खुद पेपर लीक के मामले में प्रदर्शन किया और पुलिस के लाठी-डंडे खाएं हों वह इस समय छात्रों की परेशानी क्यों नहीं समझ रहा। क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान अब शिक्षा मंत्री हैं और उन्हीं के इस्तीफे की मांग की जा रही है। वह भी नीट पेपर लीक को लेकर, क्योंकि पेपर लीक के कारण कई बच्चों ने खुदकुशी कर ली। छात्र जिसका जिम्मेवार धर्मेंद्र प्रधान को ही दे रहे हैं।
पंजाब में पेपर लीक को राजा वड़िंग ने AAP को घेरा
वहीं पंजाब कांग्रेस प्रधान व सांसद राजा वड़िंग ने पेपर लीक मामले को लेकर AAP सरकरा को घेरा है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि मनीष सिसोदिया ने दावा किया कि अगर पंजाब में पेपर लीक होता है, तो ज़िम्मेदार नेता को इस्तीफ़ा देना होगा। पंजाब में ग्रुप-B का पेपर लीक हुए 6 महीने हो चुके हैं। उससे पहले, 12वीं क्लास की इंग्लिश, PSTET और फ़ार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा के पेपर भी लीक हुए थे। भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक के चार बड़े मामले सामने आए, फिर भी न तो कोई जांच हुई और न ही किसी की जवाबदेही तय की गई। तो हमें बताइए, भगवंत मान इस्तीफ़ा कब देंगे? पंजाब के युवा जवाबदेही के हकदार हैं, बहानेबाज़ी के नहीं।
हाल के सालों में भी कई बड़े विवाद
NEET-UG 2024 और 2026 दोनों परीक्षाएं कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में रहीं। जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में संदिग्ध नेटवर्क, सॉल्वर गैंग और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की जांच शुरू की। इससे पहले 2021, 2022 और 2018 में भी नीट परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थी, सॉल्वर गैंग और परीक्षा में धांधली के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
सालों से छात्रों का सवाल अब भी वही
पेपर लीक के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इस बीच सबसे अधिक प्रभावित वे लाखों छात्र हैं, जो वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। छात्रों और अभिभावकों की अपेक्षा है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
छात्रों के प्रदर्शन को भुनाने में जुटी राजनीतिक पार्टियां
वहीं छात्रों के इस प्रदर्शन का सबसे ज्यादा लाभ भी राजनीतिक पार्टियां ही ले रही हैं। विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस, सपा और आम आदमी समेत अन्य पार्टियां इसे भुनाने में लगीं हुईं हैं और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। क्योंकि पंजाब और यूपी में आगामी चुनाव होने हैं और पार्टियां इस मुद्दे को चुनावों उठाएंगी और भाजपा के खिलाफ अपने कैंपेन को चलाएंगी।