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ਵਿਕਰੇਤਾ ਤੋਂ ਇਸ਼ਤਿਹਾਰ

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भाजपा ने हाल ही में उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा था। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया, जिसके बाद वे सांसद नहीं रहे। हालांकि नियमों के अनुसार वे बिना सांसद बने भी 21 दिसंबर तक मंत्री बने रह सकते थे, लेकिन उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ दिया।

बिट्टू बोले- अब मेरा समय पंजाब के लिए

इस्तीफे के बाद रवनीत बिट्टू ने कहा कि उन्होंने दो-तीन महीने पहले ही पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जालंधर दौरे के दौरान भी उन्होंने यह बात रखी थी। उन्होंने बताया कि राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने वाले दिन ही उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया था।

बिट्टू ने कहा, “अब मेरा पूरा समय पंजाब के लिए है। मुझे राज्य में भाजपा को मजबूत करने और सरकार बनाने की जिम्मेदारी मिली है। अब मैं पूरी तरह इसी मिशन पर काम करूंगा।”

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए लिखा कि केंद्र सरकार में देश और विशेष रूप से पंजाब के लोगों की सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही। उन्होंने कहा कि जनसेवा और राष्ट्रहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आगे भी जारी रहेगी।

पंजाब चुनाव पर रहेगा फोकस

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि बिट्टू अब अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा उन्हें राज्य में प्रमुख चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

AAP का तंज

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने बिट्टू के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि वे “सतलुज के बहाव में बह गए।” यह टिप्पणी अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर बिट्टू के हालिया विरोध के संदर्भ में की गई।

‘सतलुज’ फिल्म को लेकर रहे थे चर्चा में

रवनीत बिट्टू ने फिल्म ‘सतलुज’ पर आरोप लगाया था कि इसमें पंजाब के उग्रवाद के दौर की एकतरफा तस्वीर पेश की गई है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से 25 हजार लोगों के लापता होने और कथित अवैध अंतिम संस्कार जैसे दावों के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी। उन्होंने अभिनेता दिलजीत दोसांझ की भी आलोचना करते हुए उनके नैरेटिव पर सवाल उठाए थे।

कांग्रेस से भाजपा तक का सफर

पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत बिट्टू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वे 2009 में आनंदपुर साहिब से पहली बार सांसद बने और बाद में 2014 व 2019 में लुधियाना से लोकसभा चुनाव जीते। कांग्रेस में वे मुखर नेताओं में गिने जाते थे और 2021 में उन्हें लोकसभा में कांग्रेस का नेता भी बनाया गया था।

हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। लुधियाना से चुनाव हारने के बावजूद भाजपा ने उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया। अब उनके इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि वे पूरी तरह पंजाब की राजनीति और विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

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